हनुमान चालीसा में तुलसीदास जी ने आज से लगभग 500 साल पहले पृथ्वी से सूर्य की दूरी के बारे में ऐसा वर्णन किया है जो आधुनिक वैज्ञानिक माप के काफी नज़दीक दिखता है। उस समय आधुनिक खगोलशास्त्र और सटीक नापने वाले उपकरण मौजूद नहीं थे। इसलिए यह पंक्ति केवल कविता-कलपनाओं तक सीमित नहीं लगती। यह वैज्ञानिक जिज्ञासा भी जगाती है। क्या यह सिर्फ प्रतीकात्मक भाषा है या किसी प्राचीन ज्ञान का संकेत?

हनुमान चालीसा में पृथ्वी से सूर्य की दूरी
हनुमान चालीसा की एक चौपाई ‘जुग सहस्त्र जोजन पर भानू’ सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी का वर्णन करती है। इस चौपाई की गणना के अनुसार, सूर्य से पृथ्वी की दूरी लगभग 9.6 करोड़ मील या 15.36 करोड़ किलोमीटर है, जो आधुनिक वैज्ञानिक गणनाओं के काफी करीब है।
- चौपाई: “जुग सहस्त्र जोजन पर भानू । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥”
- गणना:
- 1 युग = 12,000 वर्ष
- 1 सहस्त्र = 1,000
- 1 योजन = 8 मील
- 1 मील = 1.6 किलोमीटर
- दूरी: 12000 × 1000 × 8 = 96,000,000 मील
- किलोमीटर में: 96,000,000 × 1.6 = 153,600,000 (लगभग 15.36 करोड़ किमी)
पृथ्वी से सूर्य की दूरी पर विज्ञान क्या कहता है?
पृथ्वी से सूर्य की दूरी औसतन 15 करोड़ किलोमीटर है। इसकी इतनी सठीक माप तुलसीदास जी ने कैसे लिखी ये वाकई में हैरानी की बात है। चलिये, पृथ्वी और सूर्य की दूरी के विज्ञान को और गहराई से जानते हैं।
पृथ्वी और सूर्य के बीच की औसत दूरी लगभग 1 खगोलीय इकाई (1 AU) के बराबर होती है, जो लगभग 149,597,870.7 किलोमीटर है। किलोमीटर में यह संख्या आम तौर पर 149.6 मिलियन किमी के रूप में लिखी जाती है, और मील में यह लगभग 92.96 मिलियन मील के बराबर होती है।
पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा पूरी तरह गोलाकार रास्ते में नहीं करती, बल्कि इसका रास्ता थोड़ा अंडाकार होता है। इसी बनावट के कारण साल भर सूर्य और पृथ्वी की दूरी बदलती रहती है। आम तौर पर जनवरी में पृथ्वी सूर्य के सबसे करीब (लगभग 147.1 मिलियन किमी) होती है, जिसे नज़दीकी बिंदु (Perihelion या पेरिहेलियन) कहा जाता है। वहीं, जुलाई में यह सबसे दूर (लगभग 152.1 मिलियन किमी) होती है, जिसे बड़ा बिंदु (Aphelion या एफेलियन) कहते हैं। इन दोनों स्थितियों के बीच साल भर में करीब 5 मिलियन किमी का अंतर आता है, जो यह दर्शाता है कि पृथ्वी की कक्षा पूरी तरह गोल न होकर थोड़ी खिंची हुई (अंडाकार) है।
Jan 1, 2025 — ≈ 147.10 million km
सूर्य से पृथ्वी तक रोशनी पहुँचने में औसतन 8 मिनट 19 सेकंड का समय लगता है। प्रकाश बहुत तेज गति से, लगभग 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से चलता है। चूँकि पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी साल भर बदलती रहती है, इसलिए रोशनी को आने में लगने वाला समय भी थोड़ा कम-ज्यादा होता रहता है। जब पृथ्वी सूर्य के सबसे करीब होती है, तो रोशनी को आने में लगभग 8 मिनट 11 सेकंड लगते हैं, और जब यह सबसे दूर होती है, तो इसमें करीब 8 मिनट 27 सेकंड का समय लगता है।
हैरानी की बात है कि जब हम सूर्य को देखते हैं, तो हम उसे वैसे देख रहे होते हैं जैसा वह लगभग 8 मिनट पहले था। चूँकि प्रकाश को यात्रा करने में समय लगता है, इसलिए हम हमेशा सूर्य का 8 मिनट पुराना रूप ही देखते हैं। इसके अलावा, भले ही साल भर दूरी बदलने से पृथ्वी पर आने वाली धूप की मात्रा में थोड़ा-बहुत बदलाव आता है, लेकिन इसका हमारे यहाँ के मौसम या गर्मी पर बहुत गहरा असर नहीं पड़ता है। मौसम में बड़े बदलावों के लिए दूसरे कारण ज्यादा जिम्मेदार होते हैं।
