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अम्बे तू है जगदम्बे काली

अम्बे तू है जगदम्बे काली एक लोकप्रिय आरती है, जो माँ अम्बा को समर्पित है, जिन्हें देवी दुर्गा के उग्र रूपों में से एक माना जाता है। माँ अम्बा को शक्ति, साहस, और बुराई के विनाश का प्रतीक माना जाता है। इस आरती में देवी को जगदम्बा, अर्थात् पूरे संसार की माता के रूप में महिमामंडित किया गया है, जो अपनी करुणा से संसार की रक्षा करती हैं और अपने क्रोध से अधर्म का नाश करती हैं।

मंदिर में सिंह पर विराजमान सजी-धजी देवी दुर्गा की प्रतिमा के सामने दीपक, धूप और भोग के साथ आरती (Ambe tu hai Jagdambe kali aarti lyrics) करते हुए पुजारी।

अम्बे तू है जगदम्बे काली (Ambe tu hai Jagdambe Kali Aarti Lyrics)

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।

तेरे भक्त जनो पर माता भीर पड़ी है भारी,
दानव दल पर टूट पड़ो मां करके सिंह सवारी।
सौ-सौ सिहों से बलशाली, है अष्ट भुजाओं वाली,
दुष्टों को तू ही ललकारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

माँ-बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता,
पूत-कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता।
सब पे करूणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली,
दुखियों के दुखड़े निवारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना,
हम तो मांगें तेरे चरणों में छोटा सा कोना।
सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली,
सतियों के सत को संवारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली,
वरद हस्त सर पर रख दो माँ संकट हरने वाली।
माँ भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली,
भक्तों के कारज तू ही संवारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

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