नौ निधियां क्या हैं?

नौ निधियां (Nau Nidhi) साधारणतः कुबेर (देवों के कोषाध्यक्ष) से जुड़ी दिव्य-निधियों के रूप में वर्णित हैं — इन नव-निधियों के नाम और क्रम में कुछ पारंपरिक भिन्नताएँ देखने को मिलती हैं, पर जो सबसे अधिक उद्धृत सूची मिलती है, उसे हमने लिखा है।

माँ लक्ष्मी की दिव्य छवि जिसमें नव या नौ निधियाँ (nau nidhi), स्वर्ण, कमल और समृद्धि के प्रतीक दर्शाए गए हैं।

नौ निधियां क्या हैं? (Nau Nidhi)

नौ निधि इस प्रकार हैं:

  1. पद्म निधि — ज्ञान/सत्वसम्पन्न निधि (कहा जाता है: सात्विक स्वरूप)।
  2. महापद्म निधि — बड़े पैमाने की पद्म-प्रकार संपन्नता (प्रभवशः लंबी पीढ़ियों तक प्रभाव)।
  3. नील निधि — नीलम-प्रकृति; व्यापार/वाणिज्य से जुड़ी संपदा (कुछ स्रोतों में मिश्रित गुण बताए जाते हैं)।
  4. मुकुंद निधि — वैभव-प्रधान, राजसी स्वरूप की निधि (रजोगुण प्रधान बताई जाती है)।
  5. नंद निधि — आनंद/लाभ से जुड़ी निधि; दीर्घायु/स्थिरता से भी संबंधित बताई जाती है।
  6. मकर निधि — मकर (मगर) से संबन्धित निधि — समुंद्री/विशिष्ट संपदा-प्रकार।
  7. कच्छप निधि — कछुए-सम्बन्धी रूपक निधि; कुछ परंपराओं में स्थिरता/धैर्यवाले लाभ से जोड़ी जाती है।
  8. शंख निधि — शंख-रूपक निधि; प्रतिष्ठा/धन-वर्ग की एक श्रेणी।
  9. खर्व निधि — कुछ परंपराओं में अंतिम निधि को ‘खर्व’ या ‘मिश्र’ कहा गया है; अन्य परंपराओं में ‘कुंद’ आदि नाम प्रकट होते हैं।

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