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हनुमान जी की पूंछ में किसका वास था?

भगवान शिव और माँ पार्वती ही स्वयं भगवान हनुमान हैं। इसके पीछे भी बड़ी रोचक कथा आती है।

Hanuman ji ki puch: हनुमान जी का एक शक्तिशाली चित्र जो शिव और शक्ति के मिलन को दर्शाता है। इसमें एक तरफ नीला त्रिशूल और दूसरी तरफ सुनहरा कमल है, और पीछे आकाशगंगा के साथ दिव्य ॐ के चिन्ह दिखाई दे रहे हैं।

हनुमान जी की पूंछ में किसका वास था? (Hanuman ji ki Poonch ki katha)

एक कथा कहती है, माता पार्वती शिव से कहती हैं कि हमारा भी एक सुन्दर महल होना चाहिए जिसमें हम निवास करें।

भगवान शंकर ने माता की इच्छा को पूर्ण करने के लिए विश्वकर्मा को बुलाया। शिव ने उन्हें एक ऐसा महल बनाने का आदेश दिया जो इन्द्र और कुबेर के महल को भी लज्जित करने वाला हो।

जब विश्वकर्मा ने महल को बना दिया तब उसमें ग्रह प्रवेश का समय आया। ग्रह प्रवेश के लिये महान पंडित ऋषि विश्रवा (रावण के पिता) (कुछ कथाओं में रावण का भी जिक्र मिलता है) को बुलाया गया।

उन्होंने ग्रह प्रवेश को सविधि पूर्ण कराया। जब दक्षिणा का समय आया तब अपनी इच्छा प्रकट करते हुये ऋषि विश्रवा ने उस महल को ही मांग लिया।

शिव ने तथास्तु कह दिया। इस पर माता रुष्ट हो गईं और उन्होंने संकल्प किया इस महल को मैं ही नष्ट करूंगी। लेकिन ब्राह्मण की मर्यादा के कारण उन्होंने अपना क्रोध शांत किया।

शिव ने जब राम जी की सेवा के लिये हनुमान अवतार ग्रहण किया तब माता पार्वती हनुमान की पूंछ बनी। उन्होंने ही महल सहित पूरे लंका राज्य को जलाकर नष्ट किया और अपना संकल्प पूरा किया।

भगवान राम की सेवा

एक अन्य कथा कहती है, पृथ्वी सहित समस्त देवताओं, ब्रह्मा और शिव ने भगवान विष्णु की स्तुति की। तब वे प्रकट हुये और उन्होंने कहा, मैं मानव अवतार (राम) धारण कर पृथ्वी को राक्षसों से मुक्त करूंगा। उसके पश्चात भगवान शिव ने भी भगवान राम की सेवा के लिये वानर अवतार लेने का निश्चय किया।

माता पार्वती बोलीं, मैं भी आपकी और भगवान की सेवा करने के लिये चलूंगी।

शिव जी बोले, देवी! वह मेरा ब्रह्मचारी स्वरूप होगा। भगवान मानव बनेंगे इसलिये मैं उनसे निम्न वानर बनकर उनकी सेवा करूँगा। वे राम नाम से विख्यात होंगे और मैं रामदूत हनुमान के नाम से जाना जाऊंगा।

इसपर माता ने भगवान शिव और राम की सेवा करने के लिये हनुमान जी की पूँछ बनने का निर्णय किया।

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