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सीता माता का पता लगाने अंगद लंका क्यों नहीं गये थे?

हनुमान जी के स्थान पर सीता माता का पता लगाने अंगद लंका क्यों नहीं गए थे? अंगद बाली पुत्र थे और वे जा भी सकते थे लेकिन उन्हें लौट कर वापस आने में संशय था। उस संशय के कारण जान लीजिए।

अंगद लंका क्यों नहीं गये थे - सूर्यास्त के समय अंगद और जाम्बवान समुद्र तट की चट्टानों पर आमने-सामने हैं, और हनुमान उनके पीछे चट्टान पर बैठे हैं।

सीता माता का पता लगाने अंगद लंका क्यों नहीं गए थे?

जामवंत सहित हनुमान, अंगद, नल, नील आदि सभी वानर दक्षिण तट पर पहुँचे। वहाँ उनकी संपाती से भेंट हुई। संपाती ने बताया सीता लंका में हैं जो 100 योजन (1200 किलोमीटर) दूरी पर है।

अब समस्या उत्पन्न हुई कि इतने विशाल समुद्र को पार करके वहाँ कौन जायेगा। जामवंत वृद्ध हो चुके थे। लेकिन उन्होंने जवानी में विराट वामन भगवान की मात्र दो घड़ी (48 मिनट) में सात परिक्रमा किये थे।

वे विराट वामन भगवान जिन्होंने पृथ्वी समेत नीचे के सात लोक एक पैर में और ऊपर के सात लोकों को दूसरे कदम में माप लिया था और उनका तीसरा पैर रखने की जगह नहीं बची थी।

जामवंत ने सबसे पूछना शुरू किया कि कौन लंका जायेगा। और न सिर्फ जायेगा बल्कि सीता माता का पता लगाकर, उन्हें विश्वास दिलाकर सुरक्षित वापस भी आयेगा। उस रावण की लंका में जाना जो इन्द्र की अमरावती और कुबेर की अल्कापुरी से भी ज्यादा सुन्दर और सुरक्षित है, वहां से वापस भी आना असंभव के समान ही था।

सभी वानरों ने अपना बल बताया लेकिन सभी को संदेह था। अंगद ने कहा, मैं जा तो सकता हूँ लेकिन वापस आने में मुझे भी संदेह है। इस संदेह का कारण अक्षयकुमार है।

अंगद ने बताया: हम और अक्षयकुमार देव गुरु बृहस्पति के गुरुकुल में देवलोक में पढ़ते थे। कभी मुझे अक्षयकुमार की बात अच्छी नहीं लगती तो मैं उसे पीट देता था। एक बार उसने मेरी शिकायत गुरु बृहस्पति से कर दी।

गुरु बृहस्पति ने मुझे समझाया कि दोबारा ऐसा न करना। लेकिन मैंने उनकी बात न मानी और अगली बार भी अक्षयकुमार की पिटाई की। इस पर उसने फिर से गुरुदेव से कह दिया। वे क्रोधित हो गये और मुझे श्राप दिया, यदि फिर कभी तूने अक्षयकुमार से लड़ाई की तो तेरी मृत्यु हो जायेगी।

मैं लंका तो चला जाऊँगा लेकिन यदि अक्षयकुमार से मेरी लड़ाई हुई तो मेरी मृत्यु निश्चित है। इसलिये मुझे लंका से वापस आने में संदेह है।

जामवंत ने अंगद को इसलिए भी नहीं भेजा क्योंकि वे युवराज थे। युवराज का दूत बनकर जाना किसी भी प्रकार से उचित नहीं है।

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जानने योग्य प्रश्न

समुद्र पार कर अंगद लंका क्यों नहीं गए थे?

समुद्र पार कर अंगद लंका इसलिए नहीं गए क्योंकि उन्हें गुरु बृहस्पति का श्राप था। हनुमान जी ने लंका जाकर उस श्राप को खत्म कर दिया।

जामवंत ने किसकी परिक्रमा की थी?

जामवंत ने जवानी में विराट वामन भगवान की परिक्रमा की थी। जिन्होंने दो कदम में ही पूरा ब्रहमांड माप लिया था।

हनुमान जी ने कितना योजन समुद्र लांघा था?

हनुमान जी ने 100 योजन या 1200 किलोमीटर का समुद्र लांघा था।

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