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आजकल कोई भी पूजा या अनुष्ठान सफल क्यों नहीं होता?

क्या आप जानते हैं, आजकल कोई भी पूजा या अनुष्ठान सफल क्यों नहीं होता? इसके तीन मुख्य कारणों को हमने नीचे लिखा है।

Why Puja Faiils - सफ़ेद कपड़े पहने एक व्यक्ति पूजा घर में बैठकर फ़ोन चला रहा है। सामने लकड़ी की मेज पर दीया जल रहा है और एक माला रखी है। बैकग्राउंड में भगवान की मूर्ति और फूल सजे हैं।

आजकल कोई भी पूजा या अनुष्ठान सफल क्यों नहीं होता?

आजकल कोई भी पूजा या अनुष्ठान सफल न होने के कई कारण हो सकते हैं। हमने तीन मुख्य कारणों को लिखा है।

  1. शास्त्र की मर्यादा का पालन न करना
  2. सामग्री का दूषित हो जाना
  3. शुद्ध ब्राह्मण न होना या कम होना

शास्त्र की मर्यादा का पालन न करना

हम शास्त्र की मर्यादा का पालन नहीं करते। क्योंकि हम ‘मॉडर्न’ हैं। शास्त्र में जिस कार्य को जिसके द्वारा करने को कहा गया है, वह कार्य उसी को करना चाहिए। एक कहावत है कि ‘जिसका काम उसी को साजै और करे तो दण्डा बाजै।’ यदि किसी अनुष्ठान या पूजा को ब्राह्मण से सिद्ध होना बताया गया है तो वह ब्राहमण से ही करानी चाहिए।

कोई अन्य जाति का व्यक्ति किसी अन्य जाति के कार्य को उतना जान ही नहीं सकता जितना अपनी जाति का व्यक्ति अपने कार्य को जान सकता है। उदाहरण: एक किसान के बेटे को खेत के बारे में एक व्यापारी के लड़के से ज्यादा मालूम होगा। इसके अलावा, किसी अन्य की अपेक्षा में एक बनिया व्यापार में ज्यादा सफल होगा। और आप एक बनिये और क्षत्रिय के स्वभाव में अंतर साफ देख सकते हैं। यह उदाहरण आप अपने इलाके में या भारत देश के सबसे अमीर व्यक्तियों को देख सकते हैं।

शुद्ध ब्राह्मण का न होना या कम होना

शुद्ध ब्राह्मण से तात्पर्य है, ऐसा ब्राह्मण जिसका समय से यज्ञोपवीत हुआ हो, बचपन से ही संध्या की हो और शास्त्र में वर्णित सभी नियमों का पालन करता हो। ऐसे ब्राह्मण जब कोई भी पूजा या अनुष्ठान पूरी विधि के अनुसार, बिना गलती किए करते हैं तब निश्चित ही वह पूजा या अनुष्ठान वैसा ही फलित होगा जैसा वर्णित है।

सामग्री का दूषित हो जाना

आज हम यह नहीं जानते कि हम पूजा में शुद्ध वस्तु उपयोग कर रहे हैं या नहीं। शुद्ध घी, रोली, कुमकुम, गोरोचन, रक्त चंदन आदि पूजा की वस्तुयें हमारे पास उपलब्ध नहीं है। आजकल शुद्ध पूजा की सभी सामग्री मिलना अत्यंत कठिन हैं।

इन्हीं सब कारणों के कारण आजकल कोई भी पूजा या अनुष्ठान का सफल होना अत्यंत कठिन है। हाँ, सच यह है, हमें थोड़ा बहुत फल (अल्प फल) हमें मिलता है। वह देवता केवल हमारी श्रद्धा पर प्रसन्न होकर दे देते हैं।

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