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हनुमान चालीसा पढ़ने के 10 लाभ

हनुमान चालीसा पढ़ने के अनेकों लाभ हैं। बल्कि सत्य तो यह है, ऐसा कुछ है ही नहीं जो हनुमान चालीसा पाठ करने से हमें प्राप्त न हो। इसका कारण है कि हनुमान जी सब कुछ देने में समर्थ हैं। वे पूर्ण परब्रम्ह परमात्मा हैं क्योंकि हनुमान जी शिव और शक्ति के सम्मिलित रूप हैं। हनुमान चालीसा पाठ में हम उनसे कई चीजें माँगते हैं। जिन्हें वे हमारी श्रद्धा, भक्ति, पाठ में होने वाली त्रुटियाँ और सामर्थ्य आदि के आधार पर प्रदान करते हैं।

दिव्य तेज से युक्त भगवान हनुमान, हाथ में पुस्तक धारण किए हुए, जो शक्ति, निर्भयता, सुरक्षा और हनुमान चालीसा के लाभ (hanuman chalisa benefits in hindi) दर्शाता है।

हनुमान चालीसा पढ़ने के 10 लाभ

  1. शारीरिक बल में वृद्धि
  2. बुद्धि और विद्या मिलती है
  3. भूत-प्रेतों और आसुरी शक्तियों से सुरक्षा
  4. समस्त रोगों का अंत
  5. डर या भय से मुक्ति
  6. सभी प्रकार के संकटों से रक्षा
  7. अष्ट-सिद्धियाँ और नौ निधियाँ
  8. राम जी के चरणों की भक्ति
  9. बंधनों से मुक्ति
  10. राम के धाम में वास

शारीरिक बल में वृद्धि

हनुमान जी कितने बलशाली हैं, तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा में उनके बल का वर्णन करते हुए लिखा है, ‘आपन तेज सम्हारो आपै, तीनों लोक हांक तें कांपै।’ इसका अर्थ है: संसार में केवल आप स्वयं ही अपने बल को संभाल सकते हैं, क्योंकि आप में इतना बल है कि आपकी एक हुंकार1 से तीनों लोक2 काँप जाते हैं।

वे महाबलशाली हैं, इसीलिये हम उनसे बल मांगते हैं, जिसे वे हमें सहर्ष प्रदान करते हैं। हम केवल बल ही नहीं बल्कि उनसे विद्या और बुद्धि भी मांगते हैं।

बुद्धि और विद्या मिलती है

हनुमान जी ज्ञानियों में अग्रगण्य (सबसे आगे) हैं। वे सभी विद्याओं को जानने वाले हैं। हनुमान चालीसा में हम उनसे विद्या और बुद्धि मांगते हैं, जिसे वे हमें प्रसन्न होकर प्रदान करते हैं। हम उनसे कहते हैं, ‘बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं’ अर्थात: हे भगवन! हमे बल, बुद्धि और विद्या प्रदान करें। इसीलिये हनुमान चालीसा पढ़ने से शारीरिक बल, सदबुद्धि (सही और गलत का निर्णय करने वाली बुद्धि) और विद्या यानि ज्ञान प्राप्ति होती है।

भूत-प्रेतों और आसुरी शक्तियों से सुरक्षा

हनुमान जी हमारी नकारात्मक ऊर्जा (भूत, पिशाच आदि) से रक्षा करते हैं। जो भी हनुमान चालीसा का पाठ करता है और शुद्धता से रहता है, उसके निकट कभी आसुरी शक्तियां नहीं भटकती। हनुमान चालीसा में लिखा है ‘भूत पिसाच निकट नहिं आवै, महाबीर जब नाम सुनावै।’ अर्थात: भूत-पिशाच आदि के भय में जोर से ‘महावीर हनुमान’ का नाम का उच्चारण करने से नकारात्मक ऊर्जायें भाग जाती हैं।

समस्त रोगों का अंत

हनुमान चालीसा का पाठ करने से स्वतः ही रोगों का अंत हो जाता है। यदि आपको गंभीर बीमारी है तो आपको सभी नियमों और विधि का पालन करते हुए हनुमान बाहुक का पाठ करना चाहिये। साथ ही आपको ‘वीर हनुमान’ नाम का जप निरंतर करना चाहिये। ऐसा इसलिए क्योंकि चालीसा में लिखा है, ‘नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा।’ अर्थात: हनुमान जी उसके समस्त रोगों और कष्टों का अंत कर देते हैं जो निरंतर ‘वीर हनुमान’ का नाम जपता है।

नोट: इसका अर्थ यह नहीं की आप आवश्यक चिकित्सा न लें। क्योंकि आपका प्रारब्ध आ चुका है और आप साधना अब शुरू करेंगे।

डर या भय से मुक्ति

भगवान हनुमान ‘महावीर’ हैं इसलिए वे अभय प्रदान करते हैं। हनुमान जी के शरणागत भक्त निडर/भय मुक्त होते हैं क्योंकि उनके बल श्री हनुमान हैं। हनुमान चालीसा का पाठ नित्य करने वाले को सब सुख प्राप्त हो जाते हैं और वे निडर भी बनते हैं, क्योंकि उनकी रक्षा स्वयं हनुमान जी करते हैं। चालीसा में कहा गया है, ‘सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू को डरना।’ अर्थात: तुम्हारी शरण में सब सुख है क्योंकि जिसकी तुम (महावीर, महाबली) रक्षा करो उसे किसका भय सता सकता है।

सभी प्रकार के संकटों से रक्षा

हनुमान जी ‘संकटमोचन’ हैं, क्योंकि उन्होंने स्वयं श्रीराम को संकटों से बचाया3 था इसीलिए वे संकटमोचन हुए। हनुमान चालीसा पढ़ने वाले की संकटों से रक्षा स्वयं हनुमान जी करते हैं। चालीसा में आपने पढ़ा होगा ‘संकट तें हनुमान छुड़ावै, मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।’ अर्थात: हनुमान जी उसे संकट से छुड़ाते हैं जो मन से लगातार और वचन से हनुमान जी को ध्यान में लाता है।

अष्ट-सिद्धियाँ और नौ निधियाँ

हनुमान चालीसा के पाठक को अष्ट सिद्धियां और नौ निधियां प्राप्त होती हैं, लेकिन इसके लिए कई कठिन नियम भी करने पड़ते हैं। चालीसा में लिखा है, ‘अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता।’ अर्थात: हनुमान तुम अष्ट सिद्धि और नौ निधि देने वाले हो जाओ, ऐसा वरदान उन्हें माता सीता ने दिया था। इसके साथ ही चालीसा में यह भी लिखा है, ‘जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा।’ अर्थात: जो भी हनुमान चालीसा पढ़ेगा उसे सिद्धि प्राप्त होगी इसके साक्षी स्वयं भगवान शंकर हैं।

राम जी के चरणों की भक्ति

तुलसीदास जी ने लिखा है, ‘राम रसायन तुम्हरे पासा’ अर्थात: राम जी की भक्ति का मीठा रस तुम्हारे (भगवान हनुमान के) पास है। राम रस बाँटने से बढ़ता है, इसलिए हनुमान जी सुयोग्य को ढूँढ़ते हैं। चालीसा में यह भी लिखा है, ‘तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम-जनम के दुख बिसरावै।’ अर्थात: आपका भजन या भक्ति करने से व्यक्ति परमेश्वर राम के दर्शनों को पाता है, जिन्हें पाकर या जिनके दर्शन करके व्यक्ति सभी जन्मों के दुःखों को भूल जाता है और वह जीवनमुक्त हो जाता है।

बंधनों से मुक्ति

हनुमान जी बंदी को बंधन से मुक्त कराने वाले हैं, क्योंकि वे ‘बंदीमोचन’ हैं। हनुमान चालीसा के अनुसार ‘जो सत बार पाठ कर कोई, छूटहि बंदि महा सुख होई।’ अर्थात: जो भी व्यक्ति सौ बार हनुमान चालीसा पढ़ता है वह बंधन से छूटकर महा सुख पाता है। लेकिन सौ बार हनुमान चालीसा पढ़ने की विधि है।

राम के धाम में वास

हनुमान जी के भक्त अन्त में मोक्ष को प्राप्त करते हैं। चालीसा में आपने पढ़ा होगा ‘अन्तकाल रघुबर पुर जाई, जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।’ अर्थात: हनुमान चालीसा पढ़ने वाले या आपके भक्त मरने के बाद श्रीराम के धाम को जाते हैं। और यदि कहीं उनका जन्म भी होता है तो वे राम के भक्त कहलाते हैं।

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फुटनोट

  1. आपकी हुंकार से उत्पन्न होने वाले कंपन (vibration) में इतना बल है, जो तीनों लोकों को कम्पायमान कर देती है। ↩︎
  2. भूकंप या भूचाल शब्द इसलिए उपयुक्त नहीं क्योंकि ‘भू’ का अर्थ पृथ्वी से है, लेकिन यहाँ तीनों लोकों की बात हो रही है। ↩︎
  3. लीला में ही सही लेकिन उन्होंने कई बार मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्रीराम को संकटों से बचाया है। ↩︎

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