सुखकर्ता दुखहर्ता का शाब्दिक अर्थ “सुख देकर दुख हरने वाला” है। सुखकर्ता दुखहर्ता आरती का गणेश चतुर्थी के दौरान विशेष महत्व है। इस त्यौहार में भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना और विसर्जन के समय यह आरती गाई जाती है। भगवान गणेश के कई भक्त अपनी दैनिक पूजा में भी इस आरती का पाठ करते हैं, ताकि वे भगवान गणेश की कृपा प्राप्त कर सकें और उनके जीवन में सुख-शांति बनी रहे।

सुखकर्ता दुखहर्ता आरती
सुखकर्ता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नांची।
नुरवी; पुरवी प्रेम, कृपा जयाची॥
सर्वांगी सुंदर, उटी शेंदुराची।
कंठी झळके माळ, मुक्ताफळांची॥१॥
जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनः कामना पूर्ति
जय देव जय देव।
रत्नखचित फरा, तुज गौरीकुमरा।
चंदनाची उटी, कुमकुम केशरा॥
हिरेजडित मुकुट, शोभतो बरा।
रुणझुणती नूपुरे, चरणी घागरिया॥२॥
जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनः कामना पूर्ति
जय देव जय देव।
लंबोदर पीतांबर, फणिवरबंधना।
सरळ सोंड, वक्रतुंड त्रिनयना॥
दास रामाचा, वाट पाहे सदना।
संकटी पावावे, निर्वाणी रक्षावे, सुरवरवंदना॥३॥
जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनः कामना पूर्ति
जय देव जय देव।
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