(Aarti Gajvadan Vinayak ki) ‘आरति गजवदन विनायक की‘ भगवान गणेश के मंगलमय स्वरूप, उनकी बुद्धिदाता शक्ति और विघ्नहर्ता रूप का सुंदर वर्णन करती है। इस आरती में भगवान गणेश को एकदंत, गजानन, लंबोदर तथा समस्त देवताओं और ऋषि-मुनियों द्वारा पूजित गणनायक के रूप में स्तुति की गई है। साथ ही उन्हें ऋद्धि-सिद्धि के स्वामी, निर्मल बुद्धि के दाता तथा विद्या, विनय और वैभव प्रदान करने वाले करुणामय देवता के रूप में स्मरण किया गया है। श्रद्धापूर्वक गजवदन विनायक की आरती का गायन करने से बाधाएँ और विपत्तियाँ दूर होती हैं तथा भगवान गणेश की कृपा से बुद्धि, ज्ञान, सफलता और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
आरति गजवदन विनायक की | Aarti Gajvadan Vinayak ki
आरति गजवदन विनायक की।
सुर-मुनि-पूजित गणनायक की॥ टेक॥
एकदंत शशिभाल गजानन,
विघ्नविनाशक शुभगुण-कानन,
शिवसुत वन्द्यमान-चतुरानन,
दु:ख-विनाशक सुखदायक की॥
आरति गजवदन विनायक की…
ऋद्धि-सिद्धि-स्वामी समर्थ अति,
विमल बुद्धि दाता सुविमल-मति,
अघ-वन-दहन, अमल अबिगत-गति,
विद्या-विनय-विभव-दायक की॥
आरति गजवदन विनायक की…
पिङ्गल नयन, विशाल शुण्डधर,
धूम्रवर्ण शुचि वज्राङ्कुश-कर,
लम्बोदर बाधा-विपत्ति-हर,
सुर-वन्दित सब बिधि लायक की॥
आरति गजवदन विनायक की…
